दिनेश मोहनिया (संगम विहार)
दिनेश सामाजिक कार्यों में जुड़े रहते हैं. छात्र जीवन के दौरान दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने ऐसे बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया जिनके माता-पिता काम पर चले जाते थे और उनके बच्चे दिनभर गलियों में आवारा घूमते थे. जनलोकपाल आंदोलन में शुरू से सक्रिय रहे और कई जिम्मेदारियां निभाई. आंदोलन के बाद पार्टी के गठन के पश्चात संगठन निर्माण में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं.
संगम विहार में जन सभा
कांग्रेस और भाजपा, संगम विहार को एक बहुत बड़े वोट बैंक के रूप देखती हैं, न कि इसमें रहने वाले निवासियों को इंसान बतौर बसने लायक सुविधा प्रदान करने के प्रयास के रूप में।
हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी यहां के निवासियों के बीच, राजनीतिक चेतना बढ़ाने व संगठित करने का काम कर रही है।
इसी प्रयास के तौर पर, 3 फरवरी, 2013 को यहां ‘पड़ोस और मोहल्लों में समितियां विकसित करो, महिलाओं और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करो!’ के विषय पर जनसभा का आयोजन किया।
इसमें पुरोगामी महिला संगठन तथा हिन्द नौजवान एकता सभा के सदस्यों के अलावा, कालेज-स्कूल की छात्र-छात्राओं और निवासियों ने हिस्सा लिया।
जनसभा को आयोजित करने, मंच संचालन करने व धन एकत्रित करने की पूरी जिम्मेदारी नौजवानों के कंधों पर थी।
जन सभा से पहले एक प्रतियोगिता आयोजित की गयी जिसमें नौजवानों और बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में निबंध का विषय था - लड़का-लड़की में अंतर, क्या भारत एक लोकतांत्रिक देश है और अपने आस-पड़ोस की समस्या। चित्रकला का विषय था - बाजार, पार्क आदि का दृश्य।
जनसभा के दौरान निबंध व चित्रकला प्रतियोगियों को पुरस्कार वितरित किये गये।
पुरोगामी महिला संगठन, हिन्द नौजवान एकता सभा तथा लोक राज संगठन के वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।
वक्ताओं ने, लोगों के द्वारा समितियों के बनाये जाने पर रोशनी डालते हुए कहा कि लोगों को अपने अधिकारों को पाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साधन न के बराबर हैं। इसकी मूल वजह यह है कि लोगों के पास राजनीतिक सत्ता नहीं है। अधिकारों और लोगों की सुरक्षा को लेकर हम वर्तमान व्यवस्था पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और भाजपा केवल पूंजीपतियों की सेवा करती हैं।
वक्ताओं ने अपनी बातों में कहा कि वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान से इंकार करती है। यह व्यवस्था, समाज में हर प्रकार के शोषण की जन्मदाता और उसे बनाये रखने के लिए जिम्मेदार है। इसी आधार पर यह व्यवस्था चलती है।
वक्ताओं ने नौजवनों को संगठित होकर अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करने का आह्वान किया।
सभा का समापन जोशपूर्ण वातावरण में हुआ
हर साल नीचे जा रहे भूजल स्तर ने संगम विहार के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग इस सोच में पड़ गए हैं कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद कमाए चंद रुपये से वह घर का राशन लेकर आएं या पानी का बोतल। क्योंकि इस इलाके के अधिकांश बोरवेल सूखने लगे हैं।
वहीं इसकी जगह नए बोरवेल लगाने की इजाजत भी नहीं है। साथ ही जल बोर्ड का टैंकर इलाके में कब आकर चला जाता है, इसकी भनक कुछ 'नसीब' वालों को ही लग पाती है। जबकि निजी टैंकर यहां की गलियों में हमेशा घूमते नजर आएंगे।
बता दें कि संगम विहार में पीने के पानी की काफी किल्लत है। यहां पानी के लिए मचे हाहाकार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बोरवेल के पास तीन-चार दिनों तक लोग कतार में लगे रहते है। तब जाकर उनका नंबर आता है। इस पर भी पानी का दबाव इतना कम होता है कि 40 लीटर का एक डिब्बा भरने में करीब 20-25 मिनट का वक्त लगता है।
सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के मुताबिक, पूरे संगम विहार इलाके में 154 बोरवेल तथा दिल्ली जल बोर्ड के 160 पानी के टैंकर स्वीकृत हैं। जिममें कई बोरवेल सूख चुके हैं। जो बोरवेल चालू अवस्था में है, उसमें 35-40 दिनों पर पानी आता है। वहीं जल बोर्ड का टैंकर भी 20-25 दिनों से पहले नजर नहीं आता है।
यहां के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि बोरवेल से लेकर पानी के टैंकर तक पानी माफिया का कब्जा है। जब उसके खिलाफ शिकायत की तो उसपर कार्रवाई होने के बजाय हमारा ही पानी का कनेक्शन काट दिया गया। इसके बाद कई बार जल बोर्ड के दफ्तर का चक्कर लगाने पर इसे जोड़ा गया। ऐसे में कोई शिकायत करने से भी डरता है।
http://aajtak.intoday.in/karyakram/heavy-water-crisis-in-sangam-vihar-delhi-1-735390.htmlhttp://aajtak.intoday.in/karyakram/heavy-water-crisis-in-sangam-vihar-delhi-1-735390.html
http://en.wikipedia.org/wiki/Sangam_Vihar_%28Vidhan_Sabha_constituency%29
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें