शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

दूषित पानी को लेकर विपक्ष का हंगामा, भाजपा के 21 विधायक सदन से निष्काषित




दूषित पानी को लेकर विपक्ष का हंगामा, भाजपा के 21 विधायक सदन से निष्काषित
नई दिल्ली. दूषित पानी की आपूर्ति पर विपक्ष ने गुरुवार को दिल्ली विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की। इसे अस्वीकार किए जाने पर विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया। हंगामे के चलते स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को तीन बार आधे-आधे घंटे के लिए स्थगित किया और उसके बाद चौथी बार भी जब विपक्षी विधायक वेल में आकर स्पीकर की सीट के सामने सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे तो मार्शल की मदद से भाजपा के सभी 21 विधायकों को सदन से निष्कासित कर दिया गया।

सदन से निकाले जाने के बाद भाजपा विधायक विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए लेकिन वहां से भी सदन परिसर में किसी भी किस्म का धरना, प्रदर्शन करने के प्रतिबंध के चलते पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके सिविल लाइंस थाने ले गई।10 मिनट तक नजरबंद रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। विपक्ष नारायणा इलाके में गंदा पानी पीने से एक महिला की मौत के मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराना चाहता था।

विपक्ष के नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि इस मामले में स्पीकर ने जिस तरह का बर्ताव किया, हम उसकी निंदा करते हैं। कांग्रेस मुद्दों से बचना चाहती है। पूरे पांच साल के कार्यकाल में हमें आधी से ज्यादा बार निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि गंदा पीने से एक महिला की मौत हो गई, इस पर सदन में चर्चा नहीं होगी तो कहां होगी? संगम विहार से विधायक एससीएल गुप्ता ने कहा कि उनके इलाके के कई कॉलोनियां ऐसी हैं जहां किसी भी घर में पानी नहीं है। रिठाला से विधायक कुलवंत राणा ने कहा कि बुराड़ी से बदरपुर तक राजधानी में पानी का संकट है।
घोंडा से विधायक साहब सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खुद 15 साल से जल बोर्ड की चेयरपर्सन हैं। इसके बावजूद दिल्ली में गंदा व अपर्याप्त पानी की आपूर्ति हो रही है, इससे शर्मनाक और क्या होगा। बिजवासन के विधायक सतप्रकाश राणा, पालम के धर्मदेव सोलंकी और द्वारका के प्रद्युम्न राजपूत ने भी कहा कि वे हर सत्र में अपने इलाकों मेंं पानी की दिक्कत का मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन उसका समाधान नहीं किया जाता। कई इलाकों में भूमिगत जलाशय भी तैयार हैं लेकिन पानी की आपूर्ति नहीं की जाती।
महिला की मौत गंदे पानी से नहीं सेप्टीसीमिया से हुई : सीएम
सदन से विपक्ष के निष्कासन के बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सदन में कहा कि डीडीयू में ६२ वर्षीय महिला सुंदरा की मौत का कारण जलजनित बीमारी नहीं था। मेडिकल रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि महिला की मृत्यु सेप्टीसीमिया के कारण हुई। उन्होंने कहा कि अगर यह मृत्यु दूषित पानी से हुई होती तो इससे अन्य लोग भी प्रभावित हुए होते।
जल बोर्ड हर माह जांच के लिए ९ से १० हजार नमूने उठाता है, जिनकी रिपोर्ट से पता चलता है कि २-४ फीसदी के बीच नमूने संतोषजनक नहीं हैं जो कि डब्ल्यूएचओ के मानकों के मुताबिक ५ फीसदी की सीमा के भीतर हैं। नीरी भी थर्ड पार्टी के तौर पर ३७५ नमूने उठाता है। सभी रिपोर्ट बताती हैं कि जल बोर्ड का पानी पीने लायक है और प्रदूषित नहीं है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें