बुधवार, 28 अगस्त 2013

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 भाजपा

भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ

 

भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ का अखिल भारतीय अधिवेषण ३० सितम्बर २०१२,रविवार को दिल्ली के सिरीफोर्ट आडिटोरियम में संपन्न हो गया | एक दिवसीय इस अधिवेषण में भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ ने ”विजन २०१४” नाम से एक स्वास्थ्य अभियान का शुभारम्भ किया है | आयोजन के अध्यक्ष डॉ.अनिल जैन ने देशभर से आये हुए चिकित्सकों का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा का चिकित्सक प्रकोष्ठ (Doctor Cell) अब चिकित्सा प्रकोष्ठ (Medical Cell) हो गया है | अब प्रकोष्ठ का कार्यक्षेत्र और लक्ष्य काफी बड़ा हो गया है | पहले प्रकोष्ठ के माध्यम से सिर्फ डाक्टरों को जोड़ा जाता था किन्तु अब चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी विधाओं के लोग भाजपा से जुड़ेंगे | डॉ. अनिल जैन ने विजन २०१४ के लक्ष्य की जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा अपने अन्त्योदय का संकल्प लेकर ‘स्वास्थ्य सबके लिए’ (Health for All) इस दिशा में कार्य करेगी | देश के लाखों डाक्टरों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को जोड़ने तथा सेवा भाव प्रधान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने का कार्य भी विजन के माध्यम से होगा | सस्ते मूल्य की दवाइयों की उपलब्धता,बजट में स्वास्थ्य सेवाओं हेतु अधिक राशी का प्रावधान, वैकल्पिक चिकित्सा को बढ़ावा देना, आयुष का प्रचार-प्रसार जैसे अनेक कार्य विजन २०१४ का लक्ष्य है | आगामी लोकसभा चुनावों के मध्यनजर बेहतर स्वास्थ्य नीति का निर्माण कर जनता को भाजपा से जोड़ने का प्रयाश होगा और भाजपा की सर्कार बनने पर इन नीतियों को लागू किया जायेगा | कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए भाजपा अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी ने कहा की भाजपा का उद्येश्य सत्ता की राजनीती नहीं बल्कि अन्त्योदय के स्वप्ना को साकार करना है | डाक्टर समाज के हर वर्ग से आत्मीयता से जुड़ा रहता है | चिकित्सक प्रकोष्ठ के माध्यम से हम अधिक से अधिक लोगों को अपने करीब लायेंगे | चिकित्सक प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ.एस.एस. अग्रवाल,आयोजन के सचिव डॉ.एस.सी.एल.गुप्ता,डॉ.रामसागर और प्रभारी व सांसद डॉ.संजय जायसवाल ने देश भर से आये डाक्टरों का स्वागत किया | कार्यक्रम में डॉ.हर्षवर्धन, डॉ.सी.पी.ठाकुर,बिहार तथा पंजाब के स्वास्थ्य मंत्रीद्वय तथा स्वास्थ्य जगत के विभिन्न संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया | दिन भर चले विभिन्न सत्रों में अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई | कार्यक्रम के समापन सत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री अरुण जेटली तथा संगठन महामंत्री रामलाल जी ने भी अपने विचार रखे | श्री अरुण जेटली ने देश के स्वास्थ्य नीति पर प्रश्नचिन्ह लगते हुए कहा कि दुनिया भारत की ओर बेहतर डॉक्टर मिलने की उम्मीद लिए देखता है लेकिन हालत यह है की हम अपने देश के लिए ही डॉक्टरों की पूर्ति नहीं कर पा रहे है | जरुरत निम्न संसाधनों पर अच्छे मेडिकल कालेज खोलने की है जिसमें गरीब के बच्चे भी मेडिकल की पढाई कर सके | देश के बुद्धिजीवी,मिडिया और नेता सबको स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषय पर अपनी समझ बढ़ानी होगी तभी हम स्वस्थ और खुशहाल भारत का निर्माण कर सकेंगे |
राजीव पाठक

Link http://www.pravakta.com/the-bjp-medical-cell

महंगाई पर भाजपा का प्रदर्शन

Wednesday , Jan 19,2011, 03:36:06 AM
नई दिल्ली !     कमरतोड मंहगाई और पेट्रोल के दामों में की गई भारी वृद्धि को लेकर मंगलवार को  भाजपा दिल्ली प्रदेश के  कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष  विजेन्द्र गुप्ता के नेतृत्व में  प्रदर्शन कर अपनी गिरफ्तारी दी। गिरफ्तारी देने वालों में 9 विधायक शामिल थे।  सरकार के खिलाफ कार्यकर्ताओं में इस कदर रोष था कि पुलिस बल प्रयोग करने पर भी उसके द्वारा लगाए गए सारे बैरिकेट तोड दिए। कार्यकर्ताओं को आगे बढने से रोकने के लिए  वॉटर टैंडरों द्वारा  पानी की तेज धार छोड़ी गई। कार्यकर्ता संसद की ओर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए बढ रहे थे और पुलिस उनको रोकने का प्रयास कर रही थी। इस दौरान  सैंकडाें कार्यकर्ताओं को चोटें आईं।  प्रदर्शन में अनेक कार्यकर्ता बैलगाड़ियों, साइकिलों और साइकिल-रिक्शा पर मोटर साइकिलें स्कूटर लादकर लाए थे।  इस मौके पर कार्यकर्ताओं के बीच  गुप्ता ने कहा कि यह सरकार जनता का मनोबल तोड़ने के लिए दोहरी चाल चल रही है। एक तरफ महंगाई रोकने के नाम पर मंत्रियों का कागजी समूह बनाया गया है दूसरी ओर एक महीने के अंदर पेट्रोल के दामों में भारी वृद्धि कर  सरकार आम आदमी के मुंह का निवाला भी छीन रही है।  दुनिया में कहीं भी तेल पर इतना ज्यादा टैक्स का भार नहीं है जितना भारत में है। यहां तेल की कीमत से अधिक सरकार टैक्स वसूलती है।  इस जनविरोधी सरकार की सारी नीतियां और योजनाएं आम आदमी विरोधी और कॉरपोरेट हितकारी हैं। इस सरकार को जितनी जल्दी विदा कर दिया जाए उतना ही देश और समाज के लिए बेहतर होगा। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष दिल्ली विधानसभा प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि इतनी गैरजिम्मेदार और जनविरोधी सरकार उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी।  यह सरकार मंहगाई घटाने के नाम पर ऐसे उपाय कर रही है जिससे मंहगाई दिनोंदिन बंढ रही है।   गिरफ्तार होने वाले विधायकों में शामिल  हैं  प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा, डॉ. जगदीश मुखी, रमेश बिधूंडी, श्याम लाल गर्ग, कृष्ण त्यागी, धर्मदेव सोलंकी, मोहन सिंह बिष्ट, डॉ. एस.सी.एल. गुप्ता।  प्रदर्शन में  मदन लाल खुराना, प्रो. ओम प्रकाश कोहली और वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे।

http://www.deshbandhu.co.in/print/66316/2

बिजली की दरें 30 प्रतिशत कम कर सकती है ईमानदार सरकार: गोयल
Jun 03, 8 : 27 pm
नई दिल्ली, 03 जून (वेबवार्ता)। दिल्ली सरकार द्वारा सभी नियमों और विनियमों की अनदेखी करते हुये दिल्ली में बिजली की दरें फिर से बढ़ाने के प्रयास विरूद्ध दिल्ली भाजपा ने बिजली की नई दरें तय करने के लिए आयोजित डीईआरसी में सुनवाई के दौरान धरना दिया। 
भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने धरना देते हुये कहा कि दिल्ली के नागरिकों पर पुनः बिजली की बढ़ी दरों का भार डाल कर निजी बिजली कम्पनियों की सहायता करने के लिए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और उनके कांग्रेसी सहयोगियों द्वारा डीईआरसी को मुखैटा के रूप में प्रयोग कर रही हैं। इस धरने में हजारों कार्यकर्त्ता, अनेक भाजपा नेता जिनमें उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व सांसद डॉ. अनीता आर्या, विधायक नरेश गौड़, डॉ. एससी.एल. गुप्ता, रविन्द्र बंसल, प्रदेश महामंत्री रमेश बिधूड़ी, जय प्रकाश उपस्थित थे।
श्री गोयल, डीईआरसी के अध्यक्ष और सदस्यों से जन सुनवाई के दौरान मिले तथा अनेक प्रश्न उठाये जिससे बिजली वितरण कम्पनियों द्वारा अभिलेखों में गड़बड़ी करने, दिल्ली सरकार द्वारा कार्रवाई करने में असफल रहने और निजी बिजली कम्पनियों के लाभ हेतु मुख्यमंत्री द्वारा बिजली की दरें बढ़ाने के निर्देशों का डीईआरसी द्वारा स्वीकार करने के पक्ष में रहना, बढ़े हुये बिजली बिल देने और नियमों का उल्लंघन करने के प्रयास का पर्दाफाश हुआ।
प्रारम्भ में डीईआरसी के अध्यक्ष ने कुछ झूठे बहाने बनाये किन्तु बाद में भाजपा अध्यक्ष द्वारा उठाये गये प्रश्नों का जवाब देने से इंकार कर दिया, जिन्होंने बिजली कम्पनियों के विरूद्ध कार्रवाई करने, बिजली की दरों में वृद्धि पर रोक लगाने और दिल्ली के नागरिकों के हित के विरूद्ध होने के लिए दिल्ली सरकार पर कार्रवाई करने की वकालत की।
अपना पक्ष रखते हुये श्री गोयल ने आधे घंटे से अधिक समय तक डीईआरसी के अध्यक्ष और सदस्यों से बात की और कहा कि विद्युत वितरण कम्पनियों ने वर्ष 2010-11 के लिए अपने विनियामक परिसम्पत्ति (वह हानि जो बिजली की दरें बढ़ाकर जनता से वसूली जानी है) 5400 बताई है जो कि लगत है और इसमें से डीईआरसी ने 3200 करोड़ रूपये का दावा स्वीकार कर लिया है जिसके फल स्वरूप 827 करोड़ रूपये बिजली की दरों में वृद्धि हुई है।  अब शेष दावे को भी स्वीकार किया जा रहा है तो दिल्ली के नागरिकों पर चार गुनी अधिक बिजली की दरों का भार पड़ेगा।
मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव तक इन बढ़ी हुई दरों को लागू होने से रोक सकती हैं किन्तु यह सच है कि एक बार डीईआरसी द्वारा बढ़ी हुई दरें स्वीकर कर लिये जाने के बाद बिजली की दरें विधानसभा चुनाव के तुरन्त बाद अवश्य लागू होंगी।  यह निंदनीय है कि दिल्ली सरकार बिजली कम्पनियों के पक्ष में खुले आम कार्य कर रही है।
श्री गोयल ने कहा कि ये बढ़ी हुई दरें वर्ष 2010-11 के लिए विनियामक दावे के संबंध में ही हैं और यह सहज कल्पना की जा सकती है कि बाद के वर्षों के संबंध में यदि दावे किये जायेंगे और उन्हें स्वीकार किया जायेगा तो बिजली की दरें कितनी बढ़ जायेंगी। डीईआरसी ने श्री गोयल को यह जानकारी दी कि उनके द्वारा इस आपत्ति के बाद कि विदेशी कम्पनी प्राइस वाटर हाउस कूपर्स रिलाइंस का भी ऑडिटर है, उसे ऑडिटर की सूची से हटा दिया गया है।
श्री गोयल ने कहा कि हमारी आपत्ति के बाद उपरोक्त कम्पनी को हटाया जाना इस बात का सबूत है कि दिल्ली सरकार बिजली कम्पनियां और डीईआरसी के बीच सांठगांठ है। उन्होंने मांग की कि डीईआरसी इन कम्पनियों की लेखा परीक्षा करने में समर्थ नहीं है अतः सीएजी द्वारा लेखा परीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने यह पुनः दुहराया कि ईमानदार सरकार बिजली की दरों में कम से 30 प्रतिशत की कमी कर सकती है।  जब भाजपा सत्ता में आयेगी तो वह बिजली की दरों में 30 प्रतिशत की कमी करेगी।
https://plus.google.com/photos/111964536080062218252/albums/5868527428250749825?banner=pwa

 http://delhiassembly.nic.in/Committee/CPMBR-10-280512.pdf

 

 

शोभना वेलफेयर सोसाइटी रजि. ने दिनांक 17.04.13 को गाँधी शांति प्रतिष्ठान, निकट तिलक ब्रिज, आई.टी.ओ., नई दिल्ली में शोभना सम्मान – 2012 समारोह का आयोजन किया. इस कार्यक्रम के संयोजक की भूमिका में रहे दिल्ली गान व दामिनी गान के लेखक सुमित प्रताप सिंह व संगीता सिंह तोमर. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे 
डॉ.एस.सी.एल.गुप्ता,अध्यक्ष पूर्वांचल प्रकोष्ठ (भाजपा), नई दिल्ली व विशिष्ट अतिथि क्रमशः थे श्री नीरज गुप्ता, अध्यक्ष, वोट फॉर इंडिया अभियान, डॉ. विनोद बब्बर, संपादक-राष्ट्र किंकर, श्री सुभाष सिंह, चेयरमैन, लीपा एवं श्री प्रदीप महाजन, चेयरमैन, आई.एन.एस. मीडिया. कार्यक्रम के संचालन की बागडोर संभाली सुमित प्रताप सिंह ने. इस कार्यक्रम में देश के चुने हुए हिन्दी ब्लॉगरों, फेसबुक पर सक्रिय हिन्दी लेखकों, पत्रकारों व तकनीकि विशेषज्ञ को शोभना ब्लॉग रत्न सम्मान-2012, शोभना फेसबुक रत्न सम्मान-2012, शोभना काव्य सृजन सम्मान-2012, शोभना पत्रकारिता सम्मान-2012 व शोभना तकनीकि सम्मान-2012 से सम्मानित किया गया. इस दौरान एक विचार गोष्ठी भी रखी गई जिसका विषय था, “सामाजिक जागरूकता में सोशल मीडिया व हिन्दी की भूमिका”, जिस पर सभी अतिथियों ने अपने –अपने विचार प्रस्तुत किए. ज्ञातव्य हो कि शोभना वेलफेयर सोसाइटी रजि. पिछले छह सालों से समाज सेवा में सक्रिय है. इस सम्मान समारोह का आयोजन सोसाइटी ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार व अपने कार्यों से समाज की सेवा करने वालों को सम्मानित करने के लिए किया गया. इस अवसर पर माधवेन्द्र सिंह तोमर, अंकित सिंह चौहान, शशि श्रीवास्तव, अंजू शर्मा, अरुणा सक्सेना, बलजीत कुमार, राजीव तनेजा, सरिता भाटिया, विनोद पाराशर, अनिल पाराशर, प्रवल यादव शैलेश भारतवासी, रतन सिंह व लाल बिहारी इत्यादि हिन्दी प्रेमियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई.

 

 

चुनाव 2014 : भाजपा ने किया 'टीम मोदी' का ऐलान







भाजपा चुनाव प्रचार के अध्यक्ष नरेंद्र मोदी
लोकसभा चुनाव 2014 : भाजपा ने किया 'टीम मोदी' का ऐलान (फाइल फोटो)
लोकसभा चुनावों से काफी पहले भाजपा ने 'टीम मोदी' के तहत प्रचार के विभिन्न पहलुओं को देखने के लिए शुक्रवार को 20 समितियों के गठन का ऐलान किया.
नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली भाजपा की केन्द्रीय चुनाव अभियान समिति के तहत सारी समितियां काम करेंगी और मोदी को रिपोर्ट करेंगी.

चुनाव अभियान समिति में 11 अन्य सदस्य शामिल किये गये हैं. इनमें मुरली मनोहर जोशी, एम वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली, अनंत कुमार, थावरचंद गहलौत, रामलाल, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और मनोहर पारिक्कर शामिल हैं.

भाजपा संसदीय बोर्ड की गुरुवार को हुई बैठक के बाद आज 20 समितियों में शामिल सदस्यों की सूची जारी की गयी. पार्टी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार ने दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्रीय चुनाव अभियान समिति का मार्गदर्शन अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी एवं पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह करेंगे.

भाजपा संसदीय बोर्ड ने राजनाथ और मोदी को आगामी लोकसभा चुनावों के लिए विभिन्न पहलुओं को देखने वाली समितियों के गठन के लिए अधिकृत किया था. दोनों नेताओं ने समितियों का गठन कर इसमें सदस्यों को नामित किया.

वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को ‘घोषणापत्र’ तैयार करने वाली समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. इसमें जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, प्रेम कुमार धूमल, सुशील कुमार मोदी, जुएल उराव, विजय कुमार मल्होत्रा, लक्ष्मीकांत चावला, सत्यपाल मलिक, बंडारू दत्तात्रेय, विजया चक्रवर्ती, सत्यनारायण जटिया, शाहनवाज हुसैन, महेश चंद्र शर्मा, कंचन गुप्ता और षणमुखनाथन बतौर सदस्य शामिल हैं.
भाजपा ने फूंका चुनावी बिगुल, मोदी के नेतृत्व में 20 समितियों का किया ऐलान
पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को ‘विजन दस्तावेज’ समिति का जिम्मा सौंपा गया है. इसके सदस्यों में ओम प्रकाश कोहली, विनय सहस्त्रबुद्धे और हरी बाबू शामिल हैं.

‘प्रचार एवं प्रसिद्धि समिति’ के सदस्यों में सुषमा स्वराज, अरूण जेटली के साथ अमित शाह और सुधांशु त्रिवेदी शामिल हैं. चुनावों के लिए देश भर में पार्टी नेताओं की रैलियां आदि आयोजित करने के लिए ‘रैली समिति’ का गठन किया गया है, जिसके सदस्य अनंत कुमार और वरूण गांधी हैं.

देश भर में हर बूथ के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन आयोजित करने के लिए ‘संसदीय सम्मेलन समिति’ बनायी गयी है, जिसमें थावरचंद गहलौत, जे पी नडडा, पुरूषोत्तम रूपाला, विनोद पांडे और एल गणोशन शामिल हैं.

अनंत कुमार ने बताया कि बुनकर, श्रमिकों, किसानों आदि वर्गों’ के सम्मेलन करने के लिए ‘वर्गवार सम्मेलन समिति’ का गठन किया गया है, जिसे मुरलीधर राव, विनय कटियार, श्याम जाजू, कृष्ण दास, लुइस मरांडी, विजय सोनकर शास्त्री और महेन्द्र पांडे देखेंगे.

पार्टी ने नये मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए ‘नव मतदाता अभियान समिति’ बनायी है, जिसमें अमित शाह, नवजोत सिंह सिद्धू, त्रिवेन्द्र रावत और पूनम महाजन शामिल हैं.

लोकगीत, लोक नाटक और नुक्कड नाटकों के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए ‘पारंपरिक अभियान समिति’ बनायी गयी है, जिसे स्मृति ईरानी, कैप्टन अभिमन्यु और वाणी त्रिपाठी देखेंगी.

डाक्टरों, इंजीनियरों, चार्टर्ड एकाउण्टेंट और विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों को पार्टी से जोडने के लिए ‘बुद्धिजीवी सम्मेलन एवं भाजपा के मित्र’ समिति का गठन किया गया है, जिसके सदस्य राजीव प्रताप रूडी, प्रकाश जावडेकर और तमिल ईसाई हैं.

कुमार ने बताया कि राष्ट्रवादी संगठनों से जुडे लोगों, असंगठित मजदूरों और अन्य संगठनों से संबंधित मतदाताओं से संपर्क साधने के लिए ‘विशेष संपर्क अभियान’ समिति बनायी है, जिसमें गडकरी, उमा भारती, सी पी ठाकुर, जे के जैन, मृदुला सिन्हा, कलराज मिश्र और किरण महेरी शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि शहरों और ग्रामीण इलाकों के चार-चार, पांच-पांच मतदान केन्द्रों को एकजुट कर उनमें समन्वय स्थापित करने के लिए ‘चुनाव संगठन समिति’ का गठन किया गया है. इसमें रामलाल, वी सतीश और सौदान सिंह हैं.

कुमार के मुताबिक कांग्रेस और संप्रग सरकार के नौ साल के कथित कुशासन, महंगाई, आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार, घोटाले आदि का पर्दाफाश करने के लिए ‘कांग्रेस संप्रग के खिलाफ आरोप पत्र’ समिति बनायी गयी है. इसके सदस्यों में गोपीनाथ मुंडे, रवि शंकर प्रसाद, आरती मेहरा, किरीट सोमैया, निर्मला सीतारमण और मीनाक्षी लेखी हैं.

भाजपा नेता ने बताया कि वेबसाइट से लेकर व्हाट्सएप के जरिए चुनाव प्रचार के लिए ‘इंफार्मेशन कम्युनिकेशन अभियान समिति’ बनायी गयी है, जिसे पीयूष गोयल देखेंगे. उन्होंने बताया कि ‘जन समीक्षा और जन भागीदारी’ समिति में धर्मेन्द्र प्रधान, रामेर चौरसिया, मनोहर लाल खटटर और नलिन कोहली को शामिल किया गया है.

प्रचार प्रसार के उद्देश्य से ‘साहित्य निर्माण समिति’ बनायी गयी है, जिसे बलबीर पुंज, प्रभात झा, विनय सहस्त्रबुद्धे और सुधा मलैया देखेंगी.

चुनाव के दौरान नेताओं के कार्यक्रम और आने जाने की व्यवस्था देखने के लिए ‘कार्यक्रम और यातायात समिति’ का गठन किया गया है, जिसे मुख्तार अब्बास नकवी, अनिल जैन और अरूण सिंह देखेंगे.
पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान देने के लिए ‘पूर्वोत्तर अभियान समिति’ बनायी गयी है, जिसमें एस एस अहलूवालिया, तापिर गाव, पदमनाभ आचार्य और किरन रिज्जू शामिल हैं.

चुनाव आयोग और कानून संबंधी मामलों को देखने के लिए बनायी गयी समिति में सतपाल जैन, भूपेन्द्र यादव, रामकृष्ण और पिंकी आनंद शामिल हैं. ‘बूथ समिति संकलन समिति’ में रूडी, सुधा यादव और रेणु कुशवाहा होंगी.

‘जन प्रचार विशेष समिति’ को दो भागों में बांटा गया है. रैलियां, संसदीय सम्मेलन, बुद्धिजीवी सम्मेलन आदि विभागों का मार्गदर्शन वेंकैया नायडू करेंगे और दृष्टिपत्र, वर्गवार विशेष संपर्क और नये मतदाता अभियान का मार्गदर्शन गडकरी करेंगे.



बी.जे.पी. ने की समीक्षा--यूपीए : आजादी के बाद की भ्रष्टतम सरकार

:

Published on June 4, 2011 by   ·   1 Comment Print This Post Print This Post सुरेंदर अग्निहोत्री ,,
आई.एन.वी.सी.
लखनऊ ,
प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिहं के नेतृत्व में यूपीए-2 सरकार ने अपने दो साल पूरे कर लिए है। उक्त अवसर पर प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह और यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गान्धी दोनों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प व्यक्त किया। इससे बड़ी विडम्बना नहीं हो सकती क्योंकि एक ऐसी सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने का संकल्प कर रही है, जिसका हाल तक का एक मन्त्री, एक वरिष्ठ कांग्रेसी सांसद और यूपीए के एक महत्वपूर्ण घटक के नेता की पुत्री भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोपों पर तिहाड़ जेल में बन्द हैंं। यह बात काफी अहम है कि ये गिरफ्तारियां भाजपा के अभियान, सतर्क मीडिया, के दबाव तथा सर्वोच्च न्यायालय की सतत निगरानी के कारण सम्भव हो सकीं। वस्तुत: इसके लिए डॉ. मनमोहन सिंह या उनकी सराकर कोई श्रेय नहीं ले सकती क्योंकि कार्रवाई करने की बजाए उन्होंने तो इनमें से कुछ को निर्दोष होने का प्रमाणपत्र दे दिया था। यह जाहिर है कि डॉ. मनमोहन सिंह आजादी के बाद की देश की सर्वाधिक भ्रष्ट सरकार के मुखिया हैं। इसमें पारदÆशता की कमी है, उच्च स्तर पर संलिप्तता है, किसी प्रकार का कोई अंकुश नहीं है, पूरा तन्त्र ढह चुका है तथा रोज-रोज नए घोटाले सामने आ रहे हैं। दरअसल, यह प्रधानमन्त्री की `षड्यन्त्रकारी चुप्पी´, `अपराधी उदासीनता´, और `घोर लापरवाही´ थी की उनकी नाक के नीचे उनका एक मन्त्री देश के खजाने को लूटता रहा और वे उसकी अनदेखी करते रहे। इसमें यूपीए की सर्वशक्तिमान नेता श्रीमती सोनिया गान्धी की चुप्पी भी उल्लेखनीय थी।
घोटालों और राष्ट्रीय सम्पित्त की लूटा का यह सिलसिला काफी बड़ा है। लेकिन, उनमें से कुछ प्रमुख का यहां उल्लेख किया जा रहा है।
2जी स्पेक्ट्रम के आबण्टन और लाइसेंस जारी करने में घोटाला
संचार मन्त्रालय, भारत सरकार में 2जी लाइसेंसों के आबण्टन में हुआ घोर भ्रष्टाचार स्वतन्त्र भारत के इतिहास की सबसे शर्मनाक घटना है। यह तन्त्र के दुरूपयोग, गलतबयानी और धोखाधड़ी का एक गम्भीर मामला है, जिसमें बहुमूल्य स्पेक्ट्रम और लाइसेंस आबण्टन में भारी राशि के एवज में चुनिन्दा लोगों को फायदा पहुंचाया गया। यह तथ्य सर्वविदित है कि कैसे लाइसेंसों के लिए आवेदन सार्वजनिक रूप से 1/10/2007 तक मंगाए गए थे, उसके बाद एक नकली कट-ऑफ तिथि 25/9/2007 बनाई गई और 25/9/2007 तथा 1/10/2007 के बीच किए गए सभी आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। खेल शुरू होने के बाद खेल के नियमों में बदलाव होने पर प्रधानमन्त्री चुप्पी साधे रहे। इस पर कोर्ट ने भी प्रतिकूल टिप्पणी की।
प्रधानमन्त्री ने तब भी चुप्पी साधे रखी जब तत्कालीन मन्त्री ए. राजा ने 02 नवम्बर, 2007 के उनके पत्र की खुली अवहेलना की, जिसमें उन्होंने स्पेक्ट्रम के उचित मूल्य के लिए पारदशÊ प्रक्रिया अपनाने पर बल दिया था क्योंकि 2007 में इसे 2001 के मूल्य पर बेचा जा रहा था, जबकि देश में टेलीडेंसिटी कई गुणा बढ़ चुकी थी। देश को यह जानने का हक है कि सरकार के मुखिया के रूप में प्रधानमन्त्री ने हस्तक्षेप करते हुए सारी प्रक्रिया को रोका क्यों नहीं जब सभी नियमों को ताक पर रख स्पेक्ट्रम कम मूल्य पर बेचा जा रहा था। क्या डॉ मनमोहन सिंह स्वयं जानकारी के बावजूद नहीं कार्यवाही करने और देश के राजस्व को हानि पहुंचाने के दोषी हैं कि नहीं। एक दिन के भीतर 120 लाइसेंस जारी किए गए तथा स्पेक्ट्रम का आबण्टन किया गया, जिसमें कई अपात्र कम्पनियों को भी लाइसेंस मिल गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि एक नियमित सीबीआई मामला दर्ज हो जाने के बाद भी, डॉ. मनमोहन सिंह ने 26, जुलाई, 2009 को यह सार्वजनिक बयान दिया कि संचार मन्त्री ए. राजा के खिलाफ आरोप सही नहीं है। यह कह कर वे सीबीआई को क्या सन्देश देना चाह रहे थे, जो सीधे उन्हीं के तहत काम करती है। जब उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की निगरानी शुरू की तो ये वही भूतपूर्व मन्त्री थे, जो सबसे पहले गिरफ्तार हुए।
प्रधानमन्त्री को इसका जवाब देना होगा कि समय-समय पर जिम्मेदार लोगों की आपित्तयों के बावजूद उन्होंने इतना बड़ा घोटाला कैसे होने दिया। इसके उलट वे 2010 के मध्य तक तत्कालीन मन्त्री ए. राजा को बेगुनाही का प्रमाणपत्र देते रहे। तत्कालीन वित्त मन्त्री श्री पी. चिदम्बरम की भूमिका भी कई सवाल खड़े करती है। उनके विभाग द्वारा केबिनेट के 2003 के निर्णय के आलोक में ये आपत्ति बार-बार उठाई गई कि स्पैक्टम के कीमत एक पारदशीZ प्रक्रिया के अनुसार तय की जाए जिसमें उसकी सार्वजनिक नीलामी भी हो सकती है। ये बड़े आश्चर्य का विशय है कि 15 जनवरी 2008 को श्री चिदम्बरम ने तथाकिथ्त रूप से यह निर्णय कि चूंकि 10 जनवरी को लाइसेंस और स्पैटम दोनों का आबण्टन हो चुका है। अत: इस मामले को अब बन्द किया जाए। श्रीमती सोनिया गान्धी को भी कई जवाब देने हैं। यूपीए तथा कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा होने के नाते उस सरकार में जिसकी वो सर्वोच्च नेता है, जब राष्ट्र का धन लूटा जा रहा था उस समय उनकी क्या जिम्मेवारी बनती थी र्षोर्षो
जब सीएजी ने लाइसेंस निर्गत करने तथा स्पेक्ट्रम के आबण्टन के बारे में एक विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट तैयार की तथा 1.76 लाख करोड़ रूपए के नुकसान का अनुमान लगाया तो भरसक कोशिश की गई कि इस निष्कर्ष को झुठलाया जाए और वर्तमान संचार मन्त्री श्री कपिल सिब्बल ने सार्वजनिक रूप से संसद में कहा कि कोई घाटा नहीं हुआ है। अब सीबीआई ने भी अपनी जांच के दौरान पाया है कि हजारों करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है और वह भी तदर्थ आधार पर। नुकसान का प्रथम दृष्टया अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में सरकार को 35,000 करोड़ रूपए के लक्ष्य की तुलना में लगभग 67,000 करोड़ रूपए का जबर्दस्त मुनाफा हुआ और इसके अलावा ब्राडबैण्ड वायरलैस एक्सेस सÆवसेज के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी से उसे 38,000 कराड़ रूपए का और फायदा हुआ इसके बावजूद, जहां तक 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का प्रश्न है तो प्रधानमन्त्री ने किसी समीक्षा के आदेश नहीं दिए।
जब डॉ. मुरली मनोहर जोशी लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में इस मामले की जांच कर रहे थे तो तब शुरू में डॉ. मनमोहन सिंह ने स्वयं श्री जोशी की एक अनुभवी संसदीय नेता के रूप में प्रशंसा की तथा कहा था कि वे अच्छा काम कर रहे हैं। तथापि, जब डॉ. जोशी की अध्यक्षता वाली समिति ने कैबिनेट सचिव तथा प्रधानमन्त्री के सचिव को पूछताछ के लिए बुलाया तो सभी संसदीय और संवैधानिक नियमों की अवहेलना करते हुए कई केन्द्रीय मन्त्रियों द्वारा इसमें बाधा पहुंचाई गई। जाहिर है कि यह सरकार बहुत कुछ छुपाना चाहती है। डॉ जोशी ने लोकसभा के स्पीकर को अपनी रिपार्ट सौम्प दी है। हम यह मांग करते हैं कि उससे संसद के आगामी सत्र के पहले दिन संसद में प्रस्तुत करते हुए सार्वजनिक किया जाए।
अब वर्तमान कपड़ा मन्त्री और मई, 2004 से मई, 2007 तक दूरसंचार मन्त्री रहे दयानिधि मारन की भूमिका भी सन्देह के घेरे में आ गई है। उन्होंने जोर दिया और डॉ. मनमोहन सिंह आसानी से मान गए कि स्पेक्ट्रम का मूल्य निर्धारण मन्त्री समूह के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहना चाहिए क्योंकि इस बारे में डीएमके से समझौता हुआ है। इसका देश को बहुत नुकसान उठाना पड़ा। अब गम्भीर आरोप लग रहे हैं कि एक खास मोबाइल कम्पनी की 74 प्रतिशत इिक्वटी जब एक विदेशी कम्पनी ने खरीद ली तो उसे फायदा पहुंचाया गया और तत्पश्चात् यह पैसा तथाकथित रूप से एक सहायक कम्पनी के माध्यम से श्री मारन के परिवार के बिजनेस में निवेश किया गया। हितों के स्पष्ट टकराव तथा अधिकार के दुरूपयोग के अलावा यह स्पष्ट था कि सरकारी निर्णयों की बिक्री हो रही थी। जाहिर है, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
हमें उम्मीद है कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी इस घोटाले की तह तक जाएगी और देषियों को सजा मिलेगी। गठबन्धन राजनीति की मजबूरियों को भ्रष्ट लोगों का गठबन्धन नहीं बना देना चाहिए। भाजपा की यह मांग है कि धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के ऐसे गम्भीर मामले का जिम्मा यूपीए के सिर्फ एक सहयोगी (डीएमके) के ऊपर नहीं डाला जा सकता। सरकार में शीर्ष और वरिष्ठ पदों पर बैठे ऐसे लोग हैं जो इस लूट में शामिल रहे हैं। जाहिर है, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और जांच एजेंसी को पूरी छूट दी जानी चाहिए।
राष्ट्रमण्डल खेलों में आम जनता के धन की लूट
किसी भी अन्तर्राष्ट्रीय खेल का आयोजन उपलब्धि और उत्सव का मौका होता है। हांलाकि, कुछ महीने पहले दिलली में आयोजि राष्ट्रमण्डल खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने देश को गौरवािन्वत किया, लेकिन बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार से देश को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शमÊन्दगी और नाराजगी झेलनी पड़ी। भाजपा ने खासतौर पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रमण्डल खेलों में लूट को सराहनीय ढंग से तथ्यों और आकड़ों के साथ देशभर में उजागर किया है। आज, श्री सुरेश कलमाड़ी आयोजन समिति के अपने अनेक सहयोगियों के साथ जेल में हैं। लेकिन, मामला यहीं खत्म नहीं होता। वे इसके मोहरे मात्र हैं। प्रत्येक फाइल को कैबिनेट, कैबिनेट सब-कमीटी, मन्त्री समूह, सम्बन्धित मन्त्रालय, यय वित्त समिति, पीएमओ और अन्तत: प्रधानमन्त्री की मञ्जूरी मिली थी।
प्रधानमन्त्री ने श्री वी.के. शंगुलू की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया और घोषणा की कि इसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी। पांचवी रिपोर्ट में इसकी पुन: पुष्टि हुई कि गम्भीर घपले हुए हैं, जिससे ठेकेदारों को अनुचित फायदा पहुंचा है और अपव्यय तथा सरकार को नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में पाया गया है कि ठेके देने में गम्भीर अनियमितताएं हुई हैं क्योंकि शुरूआत से ही साजिश थी कि परियोजनाओं को पूरा करने में विलम्ब किया जाए, लागत बढ़ाई जाए और पैसा मांगा जाए और समय कम होने के कारण ऊंची लागत में ठेके दिए जाएं। समिति ने श्रीमती शीला दीक्षित की दिल्ली सरकार जिनके हाथ में सारी वित्तीय शक्तियां थीं, विभिé एजेंसियों जैसे डीडीए, सीपीडब्लयूडी इत्यादी, श्री सुरेश कलमाडी की अध्यक्षता वाली आयोजन समिति की कड़ी आलोचना की है। चाहे वह राष्ट्रमण्डल खेल गांव हो, यहां तक कि एयर कण्डीशनरों, कुÆसयों, टॉयलेट पेपर तक खरीद में बड़े पैमाने पर घपले हुए हैं।
इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि Þबीमारी अन्दर तक फैली है और इसे अपवाद नहीं माना जा सकता, जिसके लिए सिर्फ कनिष्ठ पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। इसमें शामिल अधिकारियों की आगे और जांच के आधार पर पहचान की जानी चाहिए और उपयुक्त कार्रवाई की जानी चाहिए।ß समिति ने आगे कहा है, Þएक प्रकार की कुटिलता से काम किया गया और परियोजनाओें में अनुचित विलम्ब शायद जानबूझकर किया गया, जिससे कि दहशत का माहौल उत्पé हो तथा सभी सम्बन्धितों को लाभ पहुंचाया जा सके।ß
राष्ट्रमण्डल खेलों के आयोजन में करदाता के कुल पैसों का नुकसान लगभग 70,000 करोड़ रूपए है। यह सर्वविदित है कि वित्तीय अनुमोदनों में पीएमओ के कुछ अधिकारी शामिल थे। अब कार्रवाई करने की बजाए दिल्ली की मुख्यमन्त्री श्रीमती शली दीक्षित ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और प्रधानमन्त्री पुन: चुप्पी साधे हुए हैं। जैसा कि शुंगलू समिति ने सिफारिश की है, भाजपा यह मांग करती है कि उच्च पदों पर आसीन उन सभी लोगों की पहचान की जाए, उनकी जांच हो तथा उन्हें पर्याप्त दण्ड दिया जाए। भाजपा की यह मांग है कि सीबीआई को दिल्ली सरकार और राष्ट्रमण्डल खेल घोटाले में मुख्यमन्त्री श्रीमती शीला दीक्षित की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए। इसमें उनकी संलिप्तता भी स्पष्ट है।
केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की संस्थागत गरीमा और नैतिकता से समझौता
यपीए सरकार ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग के अध्यक्ष के रूप में पीजी थॉमस की नियुक्ति में नैतिकता की सभी सीमाओं को पार कर दिया। वे दागदार थे क्योंकि पामोलीन घोटाले से जुड़े मामलों में उन पर चार्जशीट की गई थी, जो केरल में एक कोर्ट के समक्ष लम्बित थी। जो समिति अनंशंसा करने वाली थी, उसमें प्रधानमन्त्री और गृहमन्त्री के अलावा लोकसभा में विपक्ष की नेता भी शामिल थीं। श्रीमती सुषमा स्वराज ने श्री थॉमस की नियुक्ति का विरोध किया क्योंकि वे भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी थे। गृहमन्त्री ने गलत बयानी की कि वे दोषमुक्त हो चुके हैं। श्रीमती सुषमा स्वराज का यह अनुरोध कि नियुक्ति को एक दिन के लिए टाल दिया जाए और तथ्यों का पता लगाया जाए या किसी और नाम पर विचार किया जाए, नहीं माना गया। प्रधानमन्त्री और गृहमन्त्री दोनों ने जबर्दस्ती श्री थॉमस की नियुक्ति कर दी। यहां यह उल्लेखनीय है कि पहले दूरसंचार सचिव के रूप में उन्होंने 2जी लाइसेंस देने के बारे में सीएजी की ऑडिट का यह कह कर विरोध किया थ्ज्ञा कि यह एक नीतिगत मामला है और इसका ऑडिट नहीं हो सकता। उसके बाद जो हुआ वह सबको पता है।
सीवीसी एक नैतिक गरिमायुक्त संस्था है। उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करते समय उच्चतम न्यायालय ने पाया कि क्व्च्ज् की 2000 से 2004 के बीच की कई नोटिंग, जिसमें श्री थॉमस के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने की अनुशंसा की गई थी, चयन आयोग की जानकारी में नहीं लाई गई। कोर्ट ने कहा कि जब सीवीसी जैसी किसी संस्था की नैतिक गरिमा का प्रश्न हो तब जनहित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए और वैयक्तिक नैतिकता और गरिमा का Þनिश्चय ही संस्थागत की नैतिकता गरिमा से सम्बन्ध है।ß तदनुसार, कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया तथा यदि किसी सदस्य का विरोध है और बहुमत उसे अस्वीकार करता है तो उसे अवश्य ही इसका कारण बताना चाहिए।
एक प्रधानमन्त्री के रूप में और चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में एक दागी अधिकारी की सीवीसी के रूप में नियुक्ति थोपने के लिए डॉ. मनमोहन सिंह पूरी तरह जिम्मेवार हैं। उन्होंने अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि आखिर उन्होंने श्री थॉमस के विरूद्ध नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज की एक वैद्य आपित्त को दरकिनार क्यों कियार्षोर्षो
आदर्श कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाला
यह भी भ्रष्टाचार का एक कॉपीबुक मामला था। आदर्श कोऑपरेटिव सोसाइटी को रक्षा मन्त्रालय के नियन्त्रण वाली जमीन कारगिल के नायकों और उनकी विधवाओं के लिए फ्लैट बनाने हेतु मुम्बई के एक महंगे इलाके में दी गई थी। लेकिन, घपलेबाजी और धोखाधड़ी के जरिए इसे नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों ने हड़प लिया। जब चव्हाण राजस्व मन्त्री और विलासराव देशमुख मुख्यमन्त्री थे तो सभी नियमों से छेड़छाड़ की गई। यहां तक कि वर्तमान केन्द्रीय मन्त्री और भूतपूर्व मुख्यमन्त्री सुशील कुमार शिन्दे की भूमिका भी सन्देह के घेरे में है। इसके लाभाÆथयों में कांग्रेस के मुख्यमन्त्रियों सहित बड़े नेताओं के अनेक रिश्तेदार शिामल हैं।
यदि कारगिल के नायकों की याद के साथ हुए ऐसे अपमान पर देशभर में क्षोभ उत्पé न हुआ होता तो शायद इसकी भी जांच मुश्किल होती। हालांकि, अभी भी सन्देह कायम है क्योंकि रक्षा विभाग द्वारा प्लाट के स्वामित्व सम्बन्धी फाइल गायब हो गई है। यहां तक कि पर्यावरणीय स्वी—ति वाली फाइल केन्द्रीय पर्यावरण मन्त्रालय से गायब हो चुकी है।
एण्ट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड – देवास मल्टीमीडिया घोटाला
एक और घोटाला अन्तरिक्ष विभाग में प्रकाश में आया है, जो सीधे प्रधानमन्त्री के अधीन है। 2005 में एण्ट्रिक्स कारपोरेशन लि., इसरो की वाणििज्यक शाखा, ने देवास मल्टीमीडिया के लिए दो सैटेलाइट लांच किए और बगैर निलामी या उपयुक्त मूल्य निर्धारण किए सिर्फ 1000 करोड़ रूपए में मोबाइल टेलीफोनी सहित दुर्लभ एस-बैण्ड के बीस वषो± तक 70 डभ्Z के असीमित उपयोग का बड़ा फायदा दिया। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल सरकार ने 3जी मोबाइल सेवाओं हेतु इसी तरह की वायु तरंगों हेतु 15 डभ्Z की नीलामी से 67719 करोड़ रूपए कमाए तथा 38000 करोड़ रूपए की उगाही ब्राडबैण्ड वायरलेस एक्सेस सÆवसेज की नीलामी से हुई। इसमें न तो सरकार का कोई अनुमोदन लिया गया और न इसकी निगरानी हुई। इस सौदे के पांच वर्ष बाद इसे निरस्त करने का निर्णय जुलाई, 2010 में लिया गया। राष्ट्रीय खजाने को हुए इस नुकसान की देशव्यापी प्रतिक्रिया के बाद, इस सौदे को अन्तत: फरवरी, 2011 में रद्द किया गया। इसके पूर्व देवास मल्टीमीडिया के अधिकारी सरकार के तथा पीएमओ के उच्चाधिकारियों के सम्पर्क में थे।
अन्तरिक्ष विभाग सीधे प्रधानमन्त्री के अधीन है। जब इस भारी घपले के बारे में उनसे पूछा गया तो उनका जवाब वही था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। यह बात विचित्र लगती है कि जब कभी किसी अनियमितता के बारे में उनसे पूछा जाता है तो वे अनभिज्ञता का रोना रोते हैं। डॉ. मनमोहन सिंह से हम ये पूछना चाहेंगे कि क्या आप कोई निगरानी नहीं करते अथवा जब कभी कोई भ्रष्टाचार होता है तो उससे आप मुंह फेर लेते हैं।
विदेशी बैंकों में जमा भारतीय नागरिकों का काला धन
भारतीय नागरिकों द्वारा अपराध और भ्रष्टाचार से उपÆजत काले धन को विदेशी बैंकों में जमा करने के सवाल पर सरकार की उदासीनता से लेकर देशभर में गहरी नाराजगी है। पहले जब लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा संसदीय दल के नेता श्री लाल—ष्ण आडवाणी ने यह मुद्दा उठाया था तो कांग्रेस ने इसे चुनावी स्टण्ट बताया था। बाद में कहा गया कि सत्ता में आने के बाद सार्थक कदम उठाए जाएंगे। इस मुद्दे से जुड़े एक पीआईएल में जिस प्रकार उच्चतम न्यायालय ने प्रतिकूल टिप्पणियां की है उससे सरकार की नीयत का पता लगता है। हम सिर्फ बहुविषयी समिति द्वारा अध्ययन और पांच बिन्दुओं वाली रणनीति की बातें सुन रहें हैं। ये सिर्फ दिखावा है और इसमें ऐसा कोई इरादा नहीं कि एक समय-सीमा के भीतर कालेधन का पता लगाया जाए और देशवासियों को बताया जाए। अमेरिका दोहरी कर नीति के बावजूद टैक्स चोरों के नाम जाहिर करने के लिए स्वीस अधिकारियों को मजबूर कर सकता है। भारत अब कोई तीसरी दुनिया की अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि एक उभरती हुई आÆथक महाशक्ति है, जिसकी जी-20 राष्ट्रों में अच्छी दखल है। इसका इस्तेमाल आखिर सरकार क्योंकि नहीं करती। भ्रष्टाचार के विरूद्ध संयुक्त राष्ट्र सन्धि जो दिसम्बर 2005 में प्रभावी हुई थी, उसका अनुसमर्थन भारत ने अभी पिछले सप्ताह ही किया है। यह वैश्विक भ्रष्टाचार से लड़ने का एक व्यापक उपकरण है। यदि उच्चतम न्यायालय की निगरानी नहीं होती तो प्रवर्तन निदेशालय और अन्य एजेंसियों को हसन अली की निष्पक्ष जांच नहीं करने दी जाती जो लगभग 76,000 करोड़ रूपए का कर चोर है तथा जिसके कई विदेशी खाते हैं। इसका कारण स्पष्ट है, आरोपित व्यक्तियों की जांच के दौरान कुछ बड़े कांगेसी नेताओं के विरूद्ध भी आरोप लगे हैं।
यूपीए सरकार में घोटाले एक के बाद एक चौंकाने वाली नियमितता से प्रकट होते रहते हैं। अनाज और खाद्य के आयात निर्यात में जितनी भयंकर अनियमितताएं हुई हैं उसकी जानकारी सार्वजनिक है। एफ.सी.आई. के गोदामों में रखा लाखों टन अनाज सड़ गया और गरीब जनता भूख से कराहती रही, ये भी देश जानता है। अब कोयला के ब्लॉक के आबण्टन में भी भयंकर अनिमतताओं की िशकायत सामने आ रही है, जो निजी हाथों में दिए गए हैं। ये आबण्टन उस समय के भी हैं जब डॉ मनमोहन सिंह स्वंय कोयला मन्त्री थे। ऐसे महंगे कोल ब्लॉक गैर सार्वजनिक निजी कम्पनियों और सार्वजनिक प्रतिश्ठानों को आबण्टित किए गए। जिनका काम सवालों के घेरे में था और जिनकी योजनाएं सिर्फ कागज पर थीं।
उपरोक्त उदाहरण यूपीए-1 तथा यूपीए-2 सरकारों की भ्रष्टाचार की सिर्फ मिसालें हैं। नि:सन्देह आजादी के बाद से आज तक किसी भी सरकार पर भ्रष्टाचार के इतने आरोप नहीं लगे। देश ने देखा कि किस तरह शर्मनाम ढंग से रिश्वतखोरी के जरिए डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने लोकसभा में विश्वास प्रस्ताव जीता। आज तक भी दोषियों के विरूद्ध कोई दण्डात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। समूची यूपीए सरकार ओटैवियो क्वात्रोच्ची को बचाने में जुटी हुई थी, सिर्फ इसलिए कि गान्धी परिवार से उनकी करीबी थी। सभी को पता है कि कैसे एक सरकारी विधि अधिकारी की गलतबयानी के आधार पर बोफोर्स घोटाले के रिश्वत का पैसा उसके लन्दन बैंक खाते से मुक्त किया गया था। इन घोटालों के कारण देश की जो तबाही हुई है, इसकी जिम्मेवारी से श्रीमती सोनिया गान्धी और डॉ. मनमोहन सिंह बच नहीं सकते। उन्हें जवाब देना होगा। देश को अपने निष्कर्ष निकालने का हक है।
भाजपा इन घपलों और घोटालों को उजागर करती रहेगी और इनके खिलाफ लड़ती रहेगी। भाजपा की मांग है कि अपराध और भ्रष्टाचार से अÆजत भारतीय नागरिको का समस्त काला धन जो विदेशी बैंकों में जमा है, एक निश्चित समय-सीमा के भीतर भारत लाया जानाचाहिए और पर्याप्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह भी जरूरी है कि यूपीए सरकार के विभिé घोटालों में शामिल सभी बड़े-बड़े लोगों पर कोर्रवाई होनी चाहिए।
जिस शर्मनाक तरीके से डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने सार्वजनिक सम्पत्ति और कर दाताओं के पैसे के लूट की छूट दी उस आधार पर उसने शासन करने के सारे नैतिक आधार को खो दिया है। इस कारण भारत और भारतीयों का सिर शर्म से झुक गया है और पूरी दुनिया में देश की बदनामी हुई है।
भारतीय जनता पार्टी देश की जनता का आह्वान करती है कि वह यूपीए सरकार और शासन के दौरान जितने आयोजित और प्रायोजित भ्रष्टाचार हुए हैं उनके खिलाफ निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार हो क्योंकि यूपीए का भ्रष्टाचार देश की राजनीति और शासन व्यवस्था को अन्दर से कमजोर और खोखला कर रहा है। जनमत का दबाव इसलिए भी आवश्यक है कि जो दोषी हैं

मित्रो अपने संगम विहार पेज को अधिक से अधिक देश भक्तो तक पहुचाने के लिए आपकी मदद चाहिए... खासकर संगम विहार के लोगो से अपील है के वोह अपने फेसबुक मित्रो को जरूर invite करे.

निचे इक लिंक दे रहा हूँ इस पर क्लिक कर के अपने मित्रो को जरूर INVITE कीजिये..

https://www.facebook.com/AAPDLSangamVihar/app_181411457193

जय हिन्द जय भारत ! एक ही विकल्प #आम आदमी पार्टी.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें