संगम विहार से विधायक एससीएल गुप्ता ने
कहा कि उनके इलाके के कई कॉलोनियां ऐसी हैं जहां किसी भी घर में पानी नहीं
है। इस पर सदन
में चर्चा नहीं होगी तो कहां होगी
संगम
विहार, दक्षिणी दिल्ली स्थित एशिया की सबसे बड़ी कच्ची कालोनी है। इसमें
अधिकांश मजदूर वर्ग के सदस्य रहते हैं। यहां समस्याएं विकराल हैं। पीने का
पानी व सीवर (शौच व पानी निकासी) की सुविधा, जो कि मूलभूत अधिकार हैं, यहां
के निवासियों को प्राप्त नहीं हैं। बिजली निजीकरण के बाद ही मिली।
शीला दीक्षित कॉंग्रेस पार्टी संगम विहार को
एक बहुत बड़े वोट बैंक के रूप देखती हैं, न कि इसमें रहने वाले निवासियों को
इंसान बतौर बसने लायक सुविधा प्रदान करने के प्रयास के रूप में।
हर साल नीचे जा रहे भूजल स्तर ने संगम विहार के निवासियों की चिंता
बढ़ा दी है। लोग इस सोच में पड़ गए हैं कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद कमाए
चंद रुपये से वह घर का राशन लेकर आएं या पानी का बोतल। क्योंकि इस इलाके के
अधिकांश बोरवेल सूखने लगे हैं।
वहीं इसकी जगह नए बोरवेल लगाने की इजाजत भी नहीं है।फिर भी पूरे संगम विहार
इलाके में मैंने 154 बोरवेल लगवाये
दिल्ली जल बोर्ड के पूरे संगम विहार
इलाके में मैंने 160 पानी के टैंकर स्वीकृत करवाये गये
हैं।
हर साल नीचे जा रहे भूजल स्तर जिससे आने वाले दिनों में कई बोरवेल सूख जायेगे ।जो मेरे लिए एक चिंता कि बात बोरवेल चालू अवस्था में है, उसमें कम पानी आता है। वहीं जल बोर्ड इसकी जगह नए बोरवेल लगाने की इजाजत भी नहीं देता है ।
राकेश, दिल्ली स्थानीय निवासि संगम विहार
rakeshbachwan@yahoo.co.in
May 18, 2009, 02.44PM IST
संगम
विहार जे-फर्स्ट, हमदर्द नगर की समस्या
इस इलाके पीने के पानी की आपूर्ति सोनिया विहार जल संयंत्र से की जानी
थी। तय समय (2005) से दो वर्ष की देरी से शुरू हुए इस संयंत्र के पानी से
महरौली व अंबेडकर नगर समेत अन्य इलाकों की प्यास तो बुझ रही है, लेकिन संगम
विहार में आजतक पानी की पाइप लाइन भी नहीं डाली गई। इलाके में पानी की
किल्लत को देखते हुए वर्ष 2005 में 59 नए व पुराने ट्यूबवेल को नए सिरे से
चलाने व 50 नए हैंड पंप लगाने की कवायद भी हुई थी, लेकिन गिरते जल स्तर को
देखते हुए इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब यहां न तो ट्यूबवेल से
पर्याप्त पानी आ रहा है और न ही हैंड पंप से। सोनिया विहार जल संयंत्र का
पानी तो यहां के लोगों को मयस्सर ही नहीं है।
देवेन्द्र प्रताप (स्थानीय निवासि)
देश की राजधानी दिल्ली में संगम विहार एक ऐसा इलाका है, जहां ओखला,
तुगलकाबाद, नोएडा, गुड़गांव आदि इलाकों में काम करने वाली मजदूरों की बड़ी
आबादी रहती है। मेहनतकशों के इस मोहल्ले की आबादी करीब चार लाख है, जिसका
बहुलांश मजदूर है। यह इलाका महरौली और तुगलकाबाद के बीच में है। यहां से
गुड़गांव,नोएडा और ओखला जाना बेहद आसान है, क्योंकि यह मेन रोड पर है। विश्व
महाशक्ति की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हमारे देश की थोथी बयानबाजी को यह
उसके ही घर में झूठ साबित करता है। यहां नगर निगम के पानी के टैंकर से पीने
का पानी लेने के लिए लोग आए दिन बवाल करते रहते हैं। मोहल्ले की सड़कें
ऐसी कि पैदल चलना भी मुश्किल। बारिश में समूचा इलाका ऐसा लगता है कि जैसे
गंदा नाला उफन पड़ा हो।
कुल मिलाकर बुनियादी सुविधाओं से वंचितों का इलाका है संगम विहार। यहां
रहने वाले ज्यादातर लोग बेहद गरीबी में अपनी जिंदगी बसर करते हैं। इस
इलाके के मजदूरों के श्रम पर गार्मेंट कंपनियों की गिद्ध नजर है। चूंकि
संगम विहार का इलाका, नोएडा, गुडगांव और ओखला की मुख्य सड़क पर स्थित है,
इसलिए यह इन इलाकों की गार्मेंट कं पनियों के अनियमित कामों के लिए बहुत ही
मुफीद जगह है।
गुडगांव की एक नामी गिरामी गार्मेंट कम्पनी के लिए पीस तैयार करने वाले
ठेकेदार नूरी लखनऊ में मलीहाबाद के रहने वाले हैं। उनके साथ उनका छोटा भीई
रफीक भी काम करता है। रफीक अभी 13 साल का ही है। नूरी के परिवार के पास
जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं है। इसलिए उनका परिवार धनी किसानों के खेतों पर
काम करके किसी तरह अपना गुजारा करता है। नूरी 10 साल पहले ही ओखला आ गये
थे। उन्होंने नोएडा और ओखला की गार्मेंट कम्पनियों में काम किया। साल भर
नहीं होता था कि उन्हें गार्मेंट कम्पनी उन्हें सड़क पर फेंक देती थी। आजिज
आकर उन्होंने संगम विहार में 1500 रुपये में दो छोटे-छोटे कमरे किराये पर
लेकर गार्मेंट कम्पनियों के लिए खुद काम करना शुरू किया। एक साल हुआ जब
उन्होंने अपने छोटे भाई रफीक को भी गांव से बुला लिया।
बाल श्रम के लिए लाखों रुपया डकारने वाले और जनता को गुमराह करने वाले
एनजीओ (स्वयं सेवी संगठन) की कारस्तानी को नूरी बहुत अच्छी तरह समझता है।
वह कहता है, 'बाल श्रम की जड़ में गरीबी है, जो परिवार वालों को अपने बच्चों
से काम कराने पर मजबूर करती है। सरकार की ओर से चलने वाला बाल श्रम
उन्मूलन अभियान, गरीब परिवारों की गरीबी को दूर करने के बजाय, बच्चों से
उनका रोजगार ही छीन लेता है। नतीजतन आय का जरिया ही बंद हो जाता है और
परिवार दाने-दाने को मोहताज हो जाता है। हमें ऐसे कानून से कोई फायदा नहीं
है, अलबत्ता नुकसान ही है।’
बहरहाल, दिल्ली की अधिकांश बड़ी गार्मेंट कम्पनियां, जो विदेशों से आर्डर
लेकर उनको कपड़ा निर्यात करती हैं, संगम विहार में ठेकेदारों की छोटी-छोटी
यूनिटों में कपड़ा तैयार करवाने का काम करवाती हैं। गार्मेंट कम्पनियां
उन्हें एक सैंपल देती हैं, जिसके आधार पर ठेकेदार (मजदूर इन्हें
फैब्रीकेटर कहते हैं) अपने मजदूरों के साथ पीस तैयार करता है। इस व्यवसाय
से जुड़े ज्यादातर ठेकेदार भी नूरी की तरह ही हैं। ठेकेदारी का यह काम उनकी
आजीविका का एक सहारा है। इन ठेकेदारों में से ज्यादातर उत्तर प्रदेश और
बिहार के हैं। इसमें हर जाति और मजहब के लोग मिल जाएंगे। हालांकि सिलाई का
काम करने वाले ठेकेदारों में सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश और विहार के
ठेकेदारों की है। बड़ी कम्पनियों द्वारा कई बार इनका पेमेंट रोक देने से
ये बर्बाद भी खूब होते हैं। यही वजह है कि इलाके में इनकी संख्या स्थिर
नहीं रहती है। स्टिचिंग वर्क (सिलाई का काम) करने वाली ज्यादातर यूनिटों
के मालिक (ठेकेदार) स्वयं भी अपने मजदूरों के साथ काम करते हं। इन
ठेकेदारों में से 40 से 50 प्रतिशत ऐसे ठेकेदार हैं, जिन्होंने दिल्ली,
नोएडा या फिर गुड़गाव की किसी फैक्ट्री में मजदूर के तौर पर काम किया है।
इसलिए इन यूनिटों में मालिक-मजदूर का रिश्ता वैसा नहीं होता जैसा कि किसी
बड़ी यूनिट में होता है। मजदूर और मालिक (ठेकेदारों) के बीच आपस में
गाली-गलौज, हंसी-मजाक और यहां तक कि मारपीट भी बराबरी के स्तर पर ही होती
है।
सिलाई के काम के अलावा संगम विहार का इलाका जरी या मोती सितारा के काम के
लिए, एक मुख्य केन्द्र के रुप में भी जाना जाता है। यहां इस काम को करने
वाले ज्यादातर लोग बरेली के रहने वाले हैं। बरेली में यह काम मुगलों के
जमाने से होता आया है। इसलिए वहां के हुनरमंद मजदूर इस काम के लिए ज्यादा
सही साबित होते हैं। बरेली का दिल्ली के करीब होना भी एक वजह है। संगम
विहार में सिलाई के काम में जहां सबसे ज्यादा हिन्दू मजदूर हैं वहीं, मोती
सितारा का काम करने वाले ज्यादातर मजदूर मुस्लिम हैं। ‘ संगम विहार में
जरी के काम में लगे हुए करीब 70 प्रतिशत मजदूरों की उम्र 18 साल से कम है।
करीब 60 प्रतिशत बाल मजदूर अभी 14 साल से कम के हैं। अक्सर ऐसा देखना में
आता है कि इस काम में लगे हुए बच्चे ठेकेदार के परिवार के, उसके गांव के
या फिर उसकी पहचान के होते हैं।
कुल मिलाकर इस इलाके में किया जाने वाला जरी का काम बाल श्रमिकों के ऊपर
निर्भर है। बरेली से आने वाले बाल मजदूरों में से ज्यादातर भूमिहीन
परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। आजीविका का कोई दूसरा जरिया नहीं होने के
चलते वे इस काम को करने के लिए मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, हरदोई,
शाहजहांपुर जैसे कुछ शहरों के मजदूर भी यहां यह काम करते हैं लेकिन, वे
कुल मिलाकर भी 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हैं।
सड़कें
और गलियां
मेरे,स्थानीय निवासियों और RWA के संयुक्त प्रयास के बल पर न के बराबर ठीक
हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर नहीं।
डीडीए की गलती की वजह से यह हादसा हुआ है : डॉ.एस.सी.एल.गुप्ता
बुधवार जून 15, 2011 03:12 PM IST
दिल्ली के संगम विहार में बीती रात आई आंधी और बारिश का क़हर एक परिवार पर
टूटा। आंधी की वजह से एक सूखा पेड़ गिर गया जिसमें एक बच्चे की दब कर मौत हो
गई और दो बच्चे घायल हो गए। दरअसल, चंदन अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था
तभी उस पर पेड़ गिर पड़ा। बच्चों को बचाने के लिए लोग आनन−फानन में पहुंचे और
पेड़ को हटाया। लेकिन चंदन की मौत मौके पर ही हो गई। बाकी दो घायल बच्चों
को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि
डीडीए की गलती की वजह से यह हादसा हुआ है। लोगों के मुताबिक डीडीए को सूखे
पेड़ों की कटाई करवानी चाहिए।
रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस समारोह का आयोजन

नई
दिल्ली। गत् 16 एवं 17 जून को यहां भारतीय सांस्कृतिक परिषद के सौजन्य से व
सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति एवं बुन्देलखंड विकास परिषद के संयुक्त
तत्वावधान में दिल्ली स्थित आजाद भवन में दामोदर दास चतुर्वेदी स्मृति
सम्मान एवं महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस समारोह का अत्यन्त सफल व प्रेरक
आयोजन किया गया। दोनों दिन विभिन्न कार्यक्रमों का शुभारम्भ क्रमशः श्री
दामोदर दास एवं महारानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर पुष्प अर्पण, दीप प्रज्जवलन
एवं किशोर श्रीवास्तव व साथियों के भाईचारा गीत के साथ हुआ।
पहले दिन के साहित्यिक समारोह में जहां
अनेक कवियों ने समां बांधा वहीं दूसरे दिन के समारोह का मुख्य आकर्षण रहा
अंकित जैन एंड पार्टी द्वारा श्री प्रदीप जैन द्वारा लिखित गीत ‘हम
बुंदेले, हम बुंदेले’ का मंचन व साहित्य कला परिषद के कलाकारों द्वारा
प्रस्तुत रानी झांसी पर आधारित नृत्य नाटिका। इन कार्यक्रमों ने दर्शकों का
खूब मन मोहा। पहले दिन के विभिन्न कार्यक्रमों का कुशल संचालन जहाँ
सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के स्थानीय प्रमुख श्री सुरेश नीरव व
अरविन्द पथिक ने किया वहीं दूसरे दिन के कार्यक्रम का संचालन बुन्देलखंड
विकास परिषद के पदाधिकारी श्री अवधेश चौबे ने किया। पहले दिन के समारोह के
मुख्य अतिथि सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी एवं दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष डा०
योगानंद शास्त्री ने भाषाओं के माध्यम से देश को जोडने पर बल दिया
श्री
प्रदीप जैन एवं समाजवादी नेता रघुठाकुर, पूर्व सांसद श्री उदय प्रताप सिंह व
विधायक डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता
दूसरे दिन के समारोह के मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री
प्रदीप जैन एवं समाजवादी नेता रघुठाकुर, पूर्व सांसद श्री उदय प्रताप सिंह व
विधायक डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता ने अपने भाषणों में रानी झांसी की स्मृति
को ताजा करते हुए राष्ट्रीय एकता का आवाह्न करके श्रोताओं का खूब दिल जीता।
दोनों अवसरों पर शिक्षा, प्रशासन, फिल्म,
चिकित्सा, साहित्य एवं कला आदि क्षेत्रों की अनेक जानी-मानी हस्तियों को
सम्मानित भी किया गया। जिनमें पहले दिन दामोदर दास स्मृति सम्मान से
सर्वश्री बी. एल. गौड, सुभाष जैन, राजकुमार सचान होरी, प्रशांत योगी, डा.
प्रदीप चतुर्वेदी, प्रवीण चौहान, अशोक शर्मा, डा. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी,
शरददत्त, रिंद सागरी, डा. जया बंसल, कुंवर जावेद, ब्रजेंद्र त्रिपाठी, विजय
आईदासानी, डा० रिचा सूद, अरूण सागर, जय कुमार रूसवा को नवाजा गया। इसी
प्रकार से बुंदेलखंड विकास परिषद के प्रतिभा सम्मान से सर्वश्री डॉ. वी. के
अग्रवाल, डॉ. ओ. पी. रावत, इंजि. वी. के. शर्मा, अरूण खरे, राजीव दुबे,
डॉ. बी. एल. जैन, डॉ. वी. के. जैन, कामिनी बघेल एवं डॉ. अनिल जैन आदि को
सम्मानित किया गया।
दो दिनों तक चले इस समारोह में श्री किशोर
श्रीवास्तव की जन चेतना कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी ‘खरी-खरी’ भी दर्शकों के
आकर्षण का केंद्र बनी रही।
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3 अगस्त 2010, नई दिल्ली स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद,आजाद भवन
के आडिटोरियम में राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त मेमोरियल ट्र्स्ट एवं गहोई
वैश्य एसोसिएशन द्वारा राष्ट्र कवि मैथलीशरण गुप्त जयंती एवं पुरस्कार
वितरण समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर स्मारिका का विमोचन भी किया
गया.
इस वर्ष राष्ट्र कवि मैथलीशरण गुप्त शिरोमणि पुरस्कार श्री मानिक बच्छावत
द्वारा रचित इस शहर के लोग, राष्ट्र कवि मैथलीशरण गुप्त प्रवासी भारतीय
पुरस्कार सुश्री दिव्या माथुर द्वारा रचित झूठ, झूठ और झूठ राष्ट्र कवि
मैथलीशरण गुप्त गरिमा पुरस्कार डा. योगेंद्रनाथ शर्मा अरुण द्वारा रचित
वैदुष्मणि विद्दोत्तमा गरिमा, राष्ट्र कवि गहोई साहित्य सम्मान डा.
अनुपमा गुप्त द्वारा रचित कुरुक्षेत्र बनाम कलि क्षेत्र तथा विशेष सम्मान
श्री गोविंद गुप्त समाज सेवी शिक्षाविद, कवि तथा साहित्यकार को दिया गया.
इस समारोह की अध्यक्षता पूर्व सांसद डॉ. रत्नाकर पांडेय ने की.
उन्होंने अपने उद्बोधन भाषण में राष्ट्र कवि मैथली शरण गुप्त के जीवन
का संक्षिप्त परिचय देते हुए वर्तमान भारतीयता की संकल्पना का जनक और उन
भारतीय मूल्यों की ओर इंगित किया जिसे आज लोग त्याज्य कर चाटुकारिता और मान
मर्दन की ओर उन्मुख हो गए हैं.बातों ही बातों में उन्होंने वर्तमान
राजनीतिक पतन की ओर संकेत भी कर दिया और सुझा भी दिया कि भारत की महानता
तभी आस्तित्व में रह सकती है जब हम अपने महापुरुषों के पग चिह्नों का
अनुसरण करें.
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों में श्री प्रदीप कुमार जैन,श्री
टी.मनैया,श्रीमती दमयंती गोयल,श्री संदीप दीक्षित,श्री दिनेश मिश्र,श्री
राधेश्याम कुचिया, श्री नसीब सिंह,डॉ. कंवर सेन,डॉ. एस.सी.एल.गुप्ता,श्री
राजेश गौड़ के साथ मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद
के महानिदेशक श्री सुरेश कुमार गोयल उपस्थित थे. इस कार्यक्रम में बड़ी
संख्या में संभ्रांत वर्ग के लोग उपस्थित थे. सभागार का हाल खचाखच भरा हुआ
था.
इस कार्यक्रम का मंचीय संचालन डॉ. विवेक गौतम और प्रबंधन डॉ. अजय गुप्त
निदेशक (कार्यक्रम),भा.सा.सं परि. तथा सहयोग श्री अशोक जाजोरिया ने किया.
वैभव नहीं,आरोग्य-शक्ति के उपासक डा. एस.सी.एल. गुप्ता: लालकृष्ण आडवाणी
दीप जलाकर रजत जयंती
महोत्सव का उदघाटन करते हुए श्री लालकृष्ण आडवाणी। उनके साथ खड़े हैं डा.
हर्षवद्र्धन, डा.पी.टी. चंद्रमालि, डा. एस.सी.एल. गुप्ता, डा. नमिता गुप्ता
एवं डा. वल्लभ भाई कथीरिया (दायीं ओर के चित्र में) श्री कुप्.सी.सुदर्शन
स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन की दिल्ली इकाई के
अध्यक्ष डा. अजय कुमार छाया चित्र: पाञ्चजन्य/हेमराज गुप्ता
"इलाज
में लापरवाही, रोगी के हाथ में कीड़े पड़े' 4 नवम्बर, 2002 को एक हिन्दी
दैनिक में छपा यह शीर्षक और उसके साथ दिल दहला देने वाला चित्र समाचार पढ़ने
को मजबूर कर देता है। तेल एवम् प्रकृतिक गैस आयोग में तकनीशियन के पद पर
तैनात सुनील दायीं बाजू में गहरे जख्म और उसमें रेंगते कीड़ों के साथ दिल्ली
के एक प्रतिष्ठित अस्पताल की ड्योढ़ी पर कराहता रहा। 15 दिन अस्पताल में
भर्ती रहने के बावजूद उसकी हालत सुधरी तो नहीं अलबत्ता वह जख्म और गहरा हो
गया और बाजू की हड्डी में कीड़े पड़ गये। आपातकालीन वार्ड में डाक्टरों ने
उसका छोटा-सा आपरेशन कर पट्टी तो बांध दी थी, लेकिन उसके बाद नर्सों ने न
पट्टी खोली न, डाक्टरों ने उचित दवाई दी। दर्द बढ़ता रहा, वह कराहता रहा और
डाक्टर दर्द कम करने के लिए एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाते रहे, आखिर 31
अक्तूबर को आपरेशन के 15वें दिन पट्टी के भीतर सड़ता घाव लिए जब वह बेहोश हो
गया तब डाक्टरों का दल हरकत में आया। पट्टी खोली तो कीड़ों से बुजबुजाता
घाव देखकर डाक्टर स्तब्ध रह गए।
कुछ दिन
पहले दर्द से कराहती एक महिला को उसके परिवारजन दिल्ली के एक निजी अस्पताल
में ले गए, वहां इसलिए उसे भर्ती नहीं किया गया कि घर के लोग 8,000 रुपये
की बजाय 5,000 रुपये लेकर ही आए थे। तमाम आ·श्वासन देने के बावजूद कि अभी
घर से पैसे ले आएंगे आप इलाज तो शुरू करें, महिला को न भर्ती किया, न उसका
इलाज शुरू हुआ, जब तक परिवार के लोग पैसे लेकर आए महिला दम तोड़ चुकी थी।
ऐसी घटनाओं से उस वि·श्वास को ठेस पहुंचती है, जो डाक्टर को भगवान का दर्जा
देता है। कहा जाने लगा है डाक्टर यानी पैसा बनाने की मशीन। अपनी फीस तो
फीस, हर चीज में कमीशन। जरूरत हो या नहीं तमाम तरह की जांचों के लिए मरीज
को दौड़ा देते हैं।
चिकित्सा व्यवसाय की
गरिमा आखिर क्यों कम हो रही है? क्या भगवान का स्वरूप माने जाने वाले
डाक्टर चिकित्सा शास्त्र का मूल उद्देश्य "पीड़ा से कराहते रोगी की सेवा' को
भूलकर पैसे की दौड़ में शामिल हो गए हैं? ऐसे ही कुछ प्रश्नों पर गत 10
नवम्बर को नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन द्वारा आयोजित स्वास्थ्य सम्मेलन में
विस्तार से चर्चा हुई। नई दिल्ली के सीरीफोर्ट सभागार में आयोजित इस
सम्मेलन में देशभर से आए लगभग एक हजार डाक्टरों और चिकित्सा विज्ञान के
छात्रों ने भाग लिया और नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन का संकल्प मंत्र
दोहराया जो एक चिकित्सक को बार-बार उसके दायित्व का बोध कराता है-
न त्वहं कामये, राज्यं, न स्वर्गं नापुनर्भवम्।
कामये दु:ख तप्तानां प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्।।
अर्थात्
न राज्य की कामना है, न स्वर्ग की, न मुक्ति की, मात्र इतनी इच्छा है कि
रोगों और दु:खों से पीड़ित प्राणिमात्र की पीड़ा हर सकूं।
नेशनल
मेडिकोज आर्गेनाइजेशन चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐसा संगठन जो बार-बार
डाक्टरों को उनके कर्तव्य और स्वदेशी के भाव का भान कराता रहता है।
चिकित्सा क्षेत्र में पिछले 25 वर्षों से सक्रिय नेशनल मेडिकोज
आर्गेनाइजेशन ने अपने रजत जंयती वर्ष में अनेक कार्यक्रमों और जन सेवा की
दिशा में नये आयाम स्थापित किये। 10 नवम्बर को रजत जयंती वर्ष का समापन नई
दिल्ली में आयोजित स्वास्थ्य सम्मेलन के साथ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन उप
प्रधापनमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने किया। उद्घाटन भाषण में श्री आडवाणी
ने देश में स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा
कि इन्हीं दो लक्ष्यों को पूरा न कर पाने के कारण भारत अपनी क्षमता के
अनुरूप प्रगति नहीं कर सका। उन्होंने मानव की तीन प्रवृत्तियों-साधु
प्रवृत्ति, वणिक प्रवृत्ति और चौर्य प्रवृत्ति की चर्चा करते हुए कहा कि
संगठन वही अच्छा होता है, जो व्यक्ति की साधु प्रवृत्ति को प्रोत्साहित
करने और चौर्य प्रवृत्ति का शमन करने में सहायक हो। नेशनल मेडिकोज
आर्गेनाइजेशन चिकित्सा जगत में ऐसा ही महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
5
नवम्बर, 1977 को वाराणसी में 18 चिकित्सा महाविद्यालयों के 41 छात्रों के
साथ शुरू हुए इस संगठन के साथ आज 186 चिकित्सा महाविद्यालयों के लगभग
10,000 छात्र और चिकित्सक जुड़े हुए हैं। देशभर के चिकित्सकों को विविध
कार्यक्रमों के माध्यम से "सामाजिक ऋण' एवं "राष्ट्र ऋण' चुकाने के लिए
जाग्रत करने के उद्देश्य को लेकर शुरू हुए इस संगठन से जुड़े चिकित्सकों ने
समाज के गरीब, पिछड़ी बस्तियों एवं वनवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक
स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचायी हैं। पीड़ा से कराहते रोगी की पीड़ा हरने का
ध्येय संगठन की स्थापना के चौदह दिन बाद ही कार्यरूप में परिवर्तित होने
लगा था। आंध्र प्रदेश में भीषण चक्रवात आया था और संगठन के संस्थापक
सदस्यों में एक डा. धनाकर ठाकुर, जो उस समय दरभंगा मेडिकल कालेज में चतुर्थ
वर्ष के छात्र थे, तीन और छात्रों के साथ चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में
दवाइयां आदि लेकर पहुंचे थे। उसके बाद से देश के किसी भी कोने में जब भी
कोई प्राकृतिक आपदा आयी नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन के चिकित्सकों ने आगे
बढ़कर प्रभावित लोगों की पीड़ा हरने का कार्य किया। कहीं भी भूकम्प हो, रेल
दुर्घटना हो, अकाल हो या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा इस संगठन के चिकित्सक
वहां पहुंचे हैं। इसके अतिरिक्त इस संगठन के चिकित्सकों ने कई गांवों को
गोद लिया है, जहां वे अपनी नि:शुल्क सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। रजत जयंती
वर्ष में इस संगठन ने सेवा की दिशा में एक और सोपान तय किया और वह है अनाथ
बच्चों के लिए "निवेदिता निकेतन'। डा. धनाकर ठाकुर बताते हैं, "रांची में
स्थापित इस "निवेदिता निकेतन' में इस समय 18 बच्चे हैं। ऐसी अन्य छोटी-छोटी
परियोजनाएं हमारे संगठन ने शुरू की है। भविष्य में हमारी योजना वनवासी
क्षेत्रों में चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की है, जिसमें वनवासी छात्र ही
होंगे। यह संगठन वह दिन देखना चाहता है, जब चिकित्सकों के साथ आम जनता
स्वास्थ्य के आंदोलन से जुड़ जाए। इसके लिए हम जन-जन में स्वास्थ्य के प्रति
चेतना जाग्रत करने का प्रयास कर रहे हैं।' इस संगठन ने वनवासी क्षेत्रों
में बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया है। रांची के आसपास के वनवासी क्षेत्रों
में चल रहे एकल विद्यालयों के 40,000 बच्चों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किया
है। इसके अलावा किसी भी आकस्मिक प्राकृतिक आपदा से जूझने के लिए आपदा राहत
दल ("डिजास्टर काम्बैटिंग ग्रुप') भी बनाए हैं। इसके अंतर्गत हर प्रांत में
दवाइयों की "किट' के साथ किसी भी स्थिति में राहत पहुंचाने के लिए डाक्टर
तैयार हैं। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में "चिकित्सा में नैतिक मूल्य',
"चिकित्सा शिक्षा में सुधार' और "चलें गांव की ओर' विषयों पर चर्चा हुई।
"चिकित्सा में नैतिक मूल्य' सत्र की भूमिका प्रस्तुत करते हुए व्यवसाय से
कैंसर चिकित्सक और केन्द्र सरकार में भारी उद्योग सार्वजनिक उपक्रम मंत्री
डा. वल्लभ भाई कथीरिया ने कहा, "चिकित्सा व्यवसाय की गरिमा दिनोंदिन कम
होती जा रही है, इसका कारण स्वयं चिकित्सक हैं। अगर वे अपने व्यवसाय का
लक्ष्य पहचानें तो सही मायनों में राष्ट्र की सेवा कर सकेंगे।' इस सत्र के
मुख्य वक्ता थे दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डा. रंजीत राय चौधरी।
"चिकित्सा शिक्षा में सुधार' विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में नेशनल एकेडमी
ऑफ मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डा. हरी प्रताप गौतम ने महत्वपूर्ण बिन्दु
सामने रखे। इस सत्र का समापन करते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार
कल्याण मंत्री श्री शत्रुघ्न सिन्हा ने तम्बाकू के कारण बढ़ती बीमारियों पर
चिंता व्यक्त करते हुए तम्बाकू सेवन के बारे में जनजागरण अभियान चलाने का
आह्वान किया और कहा बीमारियों से लड़ना सिर्फ सरकार या डाक्टर का काम नहीं
है, समाज के हर व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना चाहिए।
सम्मेलन
के दूसरे सत्र का विषय था "चलें गांव की ओर' और "स्वास्थ्य के प्रति समग्र
प्रयास'। विशिष्ट अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में देव संस्कृत
वि·श्विद्यालय के कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या ने बताया कि किस प्रकार अपनी
जीवनशैली को आध्यात्मिकता और उच्च नैतिक आदर्शों से जोड़कर व्यक्ति स्वस्थ
रह सकता है। "चलें गांव की ओर' विषय पर दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव श्री
वसंत पंडित और नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक
डा. पी.के. दवे ने भी विचार व्यक्त किए।
समापन
सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के
सरसंघचालक श्री कुप्. सी. सुदर्शन ने चिकित्सकों से आत्मनिरीक्षण करने का
आह्वान करते हुए कहा कि हम पश्चिम का अंधानुकरण ही न करते रहें, अपने अतीत
और शास्त्रों को भी देखें कि हमारी स्वदेशी चिकित्सा पद्धति कितनी समृद्ध
है। उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपने उत्पाद बेचने के लिए एड्स
जैसी बीमारियों का का हौवा पैदा कर रही हैं। देशवासियों को इस षड्यंत्र से
बचाने का एक महती दायित्व डाक्टरों पर है। स्वास्थ्य सम्मेलन को पुष्पावती
सिंघानिया चिकित्सा शोध संस्थान, नई दिल्ली के अध्यक्ष, केन्द्रीय ग्रामीण
विकास मंत्री श्री शांता कुमार और समाजसेवी श्री सूर्यनारायण राव ने भी
संबोधित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन रजत जयंती महोत्सव की आयोजन समिति
के सचिव डा. अनिल जैन ने किया।द
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दविनीता गुप्ता
डॉ. एस.सी.एल. गुप्ता को विकास के नाम पर कोई फंड नहीं
राजनीतिक दल वेल्फेयर पार्टी ऑफ इंडिया के
राष्ट्रीय महासचिव डॉ. क़ासिम रसूल इलियास को साउथ दिल्ली म्यूनिसिपल
कारपोरेशन से मिले आरटीआई के दस्तावेज़ के मुताबिक इस कारपोरेशन के गठन से
लेकर 31 जनवरी, 2013 तक शीला दीक्षित को कोई धन-राशि नहीं मिली है, जिससे
वो विकास कार्य करा सकें. सिर्फ शीला दीक्षित ही नहीं, बल्कि उनके साथ
भाजपा विधायक सत प्रकाश राणा, करण सिंह तंवर, अरविन्दर सिंह, प्रेम सिंह और
डॉ. एस.सी.एल. गुप्ता के नाम भी फहरिस्त में शामिल हैं, जिन्होंने विकास
मद में कोई पैसा नहीं लिया है.
वहीं
इस कारपोरेशन क्षेत्र के 27 विधायकों में सबसे ज्यादा फंड ओखला के विधायक
मो. आसिफ खान को मिला है. उन्हें साउथ दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन से
उसके गठन से लेकर 31 जनवरी, 2013 तक 426.98 करोड़ की धन-राशि विकास कार्य
के लिए दिया गया है. लेकिन विकास का सच यहां की पब्लिक बखूबी जानती है.
वेल्फेयर
पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. क़ासिम रसूल इलियास कहते हैं
कि आरटीआई से मिले दस्तावेज़ से यह साबित होता है कि मुख्यमंत्री व दिल्ली
के अन्य विधायकों के सामने अपने इलाके के विकास का कोई न कोई विज़न है और न
कोई प्लानिंग. और न ही उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी है.
आरटीआई
के दस्तावेज़ के मुताबिक पिछले एक साल में 4692.5 करोड़ रूपये विकास कार्य
के लिए साउथ दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन क्षेत्र के 27 विधायको को दिया
गया है. हम सभी जानते हैं कि दिल्ली में चुनाव सर पर हैं और अगर ऐसे में
शीला व भाजपा के विकास का यह चेहरा आम आदमी को समझ में आ गया तो भारी-भरकम
दावों की धज्जियां उड़ सकती हैं.
टॉस्क फोर्स से अनधिकृत कॉलोनियों के
लोगों में भय व्याप्त है:डॉ.एस.सी.एल. गुप्ता
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने
इन कॉलोनियों को पास करने के लिए प्रोविजन सर्टिफिकेट बांटे???
दिल्ली सचिवालय।।
अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए बीजेपी
ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए पुलिस
ने पानी की तेज धार छोड़ी, जिससे कुछ कार्यकर्ता घायल हो गए। अध्यक्ष
विजेंद्र गुप्ता और महासचिव प्रवेश वर्मा सहित अनेक नेताओं को हिरासत में
लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया।
बीजेपी नेता दिल्ली गेट के
पास शहीदी पार्क के सामने इकट्ठे हुए जहां प्रदेश अध्यक्ष के अलावा
विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार मल्होत्रा, विधायक रमेश बिधूड़ी और
सह प्रभारी रामेश्वर चौरसिया आदि ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि
कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले दिल्ली की अनधिकृत
कॉलोनियों को पास करने की घोषणा कर दी थी। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने
इन कॉलोनियों को पास करने के लिए प्रोविजन सर्टिफिकेट बांटे थे लेकिन उसके
बाद कॉलोनियों की कोई सुध नहीं ली गई। अब लोग सुविधाओं की मांग कर रहे हैं
तो सरकार ने टॉस्क फोर्स गठित कर दी है। इस फोर्स के कारण कॉलोनियों के
लोगों में भय व्याप्त है। इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
इसके बाद बीजेपी नेता और कार्यकर्ता दिल्ली सचिवालय की ओर कूच कर गए। इन
नेताओं में विधायक धर्मदेव सोलंकी, साहिब सिंह चौहान, मोहन सिंह बिष्ठ,
श्रीकृष्ण त्यागी, डॉ. एस.सी.एल. गुप्ता, अनिल झा और पदाधिकारी पवन शर्मा
तथा आशीष सूद भी थे। बीजेपी नेताओं ने सचिवालय में जाने की कोशिश की तो
उन्हें रोक दिया गया और इस दौरान पुलिस से उनकी भिड़ंत हो गई। पुलिस ने
उन्हें रोकने के लिए पानी की तेज धार का इस्तेमाल किया जिससे मुन्नी ठाकुर
समेत कुछ कार्यकर्ता गिर गए और घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
बाद में अनेक नेताओं को हिरासत में लेकर कमला मार्केट थाने ले जाया गया और
फिर छोड़ दिया गया। बीजेपी ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को ज्ञापन भी भेजा
है।
विधायक डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता मुख्यमंत्री के पुतले को जलायेगे और चक्का जाम के साथ धरना और प्रदर्शन करेगे
पत्रकार मित्रो १६/१२/२०१०
आप सभी को
विधायक डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता संगम
विहार वासीयो के साथ १७-१२- २०१० को सुबह १०.०० बजे से हमदर्द नगर
के चौराहे पर मुख्यमंत्री के पुतले को जलायेगे और चक्का जाम के
साथ धरना और प्रदर्शन करेगे
विधायक डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता संगम विहार विधानसभा क्षेत्र की लगातार हो
रही उपेक्षा और अनधिकृत कलोनी के साथ सौतेले व्योवाहार और क्षेत्र के
विकास की मागो को लेकर १७-१२- २०१० को सुबह १०.०० बजे se हमदर्द नगर
के चौराहे पर मुख्यमंत्री का पुतले को जलायेगे और चक्का जाम के साथ विशाल
धरना और प्रदर्शन करेगे
विधायक डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता ने सभी का आवाहन करते हुये संगम विहार के
निवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आये और आकर इस
प्रदर्शन में अपनी भागीदारी निभाए ,
बुंदेलखंड को बुंदेलखंड के वासियों की ओर से एक सार्थक प्रयाश
नई दिल्ली २८ जनवरी : यह हमारे लिए हर्ष और शौभाग्य है कि बुंदेलखंड की
सभी जानकारियों से सजी सवारी और बुंदेलखंड को बुंदेलखंड के वासियों की ओर
से एक सार्थक प्रयाश के तहत Apna Bundelkhand का शुभारम्भ इंडिया
इंटरनेशनल सेंटर मे श्री जनार्दन द्विवेदी जी मेम्बर पर्लिअमेंट और
जनरल सेक्रेटरी (इंडियन नेशनल कांग्रेस ) के कर कामलो दवारा किया
गया श्री जनार्दन द्विवेदी जी ने उदघाटन समारोह की आध्याक्षता की अपने
संवोधन मे द्विवेदी जी ने अपने वचपन के खट्टे- मीठे अनुभावो से सव्हा को
अवगत कराया उदघाटन समारोह मे देश और विदेशो मे ख्याती प्राप्त विदवाना
जनो सा समावेश देखने को मिला दिल्ली जैसे शहर मे अपनी वयस्त दिनचर्या
से निकलते हुए बुंदेलखंड के शिखर पुरुषो ने अपनी उपस्थाती से इतना तया
किया की हम जैसे भी हो जहा से भी हो सकेगा बुंदेलखंड मे आने वाली और आई
विपत्तियों का मिलाकर सामना करेगे और अपने भाइयो को हर मुमकिन सुख
सुविधा देने के लिए कृत्संक्लाप है
सभा मे श्री के. एस. रामचंद्र , Addl . सेक्रेटरी एंड मेम्बर ऑफ़
समर कमेटी जिन्होंने बुंदेलखंड पैकिज को मंजूरी प्रदान दिलाने मे
महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई की उपस्थिती बुन्देली जनो के लिए हर्ष का विषय
था जिन्होंने बुंदेलखंड के गाव -गाव और जन-जन से मिलकर बुंदेलखंड पैकिज
के लिए रिपोर्ट तैयार करने मे अपना आमूल्य योगदान दिया , डॉ. एस. सी.
एल. गुप्ता जी ( विधयक संगम विहार न्यू डेल्ही ) जो की विश्व विख्यात
केंसर शल्य चिकित्सक के साथ ही राष्ट्रीय बुंदेलखंड जन विकास मंच के
संस्थापक और भूतपूर्व इंडियन मेडिकल असोसिएसन के आध्यक्ष भी रहे है
डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता जी ने कहा की हमारा विकास अगर इस रफ्तार से होना
है तब तों आने वाली दो-चार पीडियो को और इंतजार करना होगा विगत ६२ वर्षो
मे हमारे बुंदेलखंड को उपेक्षा के सथा देखा गया है और आज भी हमारी
उपेक्षा हो रही है सरकार की ये कैसी विकाश यात्रा है जो विगत ६२ वर्षो
से आम बुन्देली जनो तक नहीं पहुची पहले जब किसी पर विपदाए पडी आम और ख़ास
सभी ने बुंदेलखंड मे शरण ली अब हम पर विपदा आन पडी है हमें इस से स्वयं
ही लड़ना होगा और हम लड़ेगे और आप सभी जब संगठित हुए है सो हम बुंदेलखंड
और देश को जरूर दिशा देगे
डॉ. गुप्ता ने विराग गुप्ता के किये इस कार्य कि दिल से प्रंससा की साथ
ही साथ श्री के. एस. रामचंद्र, (Addl .सेक्रेटरी एंड मेम्बर ऑफ़
समर कमेटी) का भी आभार वयक्त किया जिन्होंने सचमुच और सटीक मूल्यांकन
अपनी रिपोर्ट मे किया.
श्रीमती मैत्रेयि पुष्पा ने अपनी साहित्यक साधना मे बुंदेलखंड की यादो
को फिर से याद किया अन्य महानुभो मे श्री सुरेश गुप्ता , एक्स.-मेम्बर
रेलवे बोर्ड ,श्री विनोद पांडेय जी आदी रहे . श्री विराग गुप्ता जो
की चैयरमेन है आर. टी. आई . foundation ने कहा की हमें जरूरत है
पार्टी लाइन से ऊपर उठा कर बुंदेलखंड के विकाश की और आगे हम एक ही चाह
रखेगे की बुंदेलखंड का समपूरन विकास हो और जहा चाह होती है वाहा राह भी
होती है हम इस वेव साईट के माध्यम से उसी रहा पर चल पड़े है!
